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Showing posts from September, 2022

Easy to make protein hair mask with covering the grey hair by regular usage.

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 In this busy life we all want healthy , silky , dense and non grey hair but but something which is easy to make or readymade and easy to use too. People tries lots of hair products by purchasing them from the market but not every product is same as the brand says . So sometimes we tries home remedies too but mostly they took lots of efforts and time of us . But today I am going to tell you  all a hair mask which is super effective and easy to make and easy to apply too . This mask contains Curd and curd acts as a natural conditioner,  reduces dandruff , moisturizes dry hair strands , Promotes hair growth by strengthening the hair follicles .  Curd is rich in protein,  vitamins and fatty acids making it a natural hair conditioner that moisturizes and softens the hair . It helps in restoring the lost moisture and helps dry hair to be soften and frizz free. It hydrates the hair perfectly.  It can control the itchy scalp too . The lactic acid in curd helps...

मां दुर्गा का पांचवा स्वरूप मां स्कंदमाता है ।

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 नमस्कार सभी को। आज नवरात्रि का पांचवा दिन है , आज के दिन मां के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा होती है। आइए स्कंदमाता के विषय में विस्तार से जानते हैं।  मां दुर्गा का पांचवा स्वरूप है स्कंदमाता । यदि इस शब्द स्कंदमाता का संधि विच्छेद करें तो बनता है (स्कंद + माता ) स्कंद अर्थात मां पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय तथा माता अर्थात कार्तिकेय की माता = स्कंदमाता ।  वैसे तो मां पार्वती सारे संसार की माता हैं किंतु जिस प्रकार हम आम स्त्रियां अपने नाम से जानी जाती हैं उतनी ही अपने बच्चों के नाम से भी जानी जाती हैं , उसी प्रकार मां पार्वती भी अपने ज्येष्ठ पुत्र  भगवान कार्तिकेय के नाम से स्कंदमाता कहलाती हैं मां का यह रूप सबसे सौम्य रूप है । भगवान कार्तिकेय प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे । मां स्कंदमाता की उपासना से भक्तों की सारी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।  इस मृत्युलोक में ही उसे परम शांति और सुख का अनुभव होने लगता है। उसके लिए मोक्ष का द्वार स्वयं सुलभ हो जाता है। स्कंदमाता की उपासना से बालरूप स्कंद भगवान की उपासना भी साथ ही हो।जाती है । यह व...

मां दुर्गा का चौथा स्वरूप मां कुष्मांडा है।

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  नमस्कार सभी को। मेरे पिछले ब्लॉग में मैंने मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा के विषय , भाव और संदेश की जानकारी आप सब को दी थी ।आज  चौथा नवरात्र है ।  इस  दिन मां के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा होती है। आइए उनके इस स्वरूप  को  हम  विस्तार से जानते हैं । संस्कृत भाषा में कूष्मांड कुम्हड़े (कद्दू) को कहते हैं ।कद्दू या कद्दू से बना मिष्ठान जैसे पेठा इन्हे बहुत अधिक प्रिय है इसलिए भक्त इन्हे कद्दू से बने मिष्ठान चढ़ाते हैं , इस कारण से भी इन्हें कूष्मांडा नाम से जाना जाता है। अपनी मंद मुस्कुराहट और अपने उदर से अंड अर्थात ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा नाम से जाना जाता है।  मां कूष्मांडा तेज की देवी हैं । इन्हीं के तेज और प्रकाश से दशों दिशाओं को प्रकाश मिलता है। कहते हैं कि सारे ब्रह्मांड की सभी वस्तुओं और प्राणियों में जो तेज है वो देवी कूष्मांडा हैं । देवी कूष्मांडा का स्वरूप मंद मंद मुस्कुराने वाला है । कहा जाता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था तो देवी भगवती के इसी स्वरूप  ने  मंद मंद मुस्कुराते हुए सृष्टि की...

मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा का वर्णन व महत्व ।

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  नमस्कार सभी को। मेरे पिछले ब्लॉग में मैंने मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप का वर्णन किया था। आज तीसरा नवरात्र है जिसमे मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।  मां चंद्रघंटा पापों का नाश करती हैं और राक्षसों का वध करती हैं। मां चंद्रघंटा के हाथों में तलवार , त्रिशूल , धनुष और गदा रहता है। उनके सिर पर आधा चांद घंटे के आकार में विराजमान रहता है इसीलिए मां के तीसरे स्वरूप को मां चंद्रघंटा का नाम दिया गया है।  दस हाथों में अस्त्र शस्त्र रखे खड़ग संग बांद । घंटे के शब्द से हरती दुष्ट के प्राण । सिंह वाहिनी दुर्गा का चमके स्वर्ण शरीर । करती विपदा शांति  हरे भक्त की पीर । मधुर वाणी बोलकर सबको देती ज्ञान । भव सागर में हूं फंसा , करो मेरा कल्याण । मां चंद्रघंटा की कथा इस प्रकार है कि एक समय महिषासुर नाम का असुर अपनी सेना लेकर स्वर्ग लोक पर आक्रमण करने पोहांच गया । वह अत्यंत शक्तिशाली था । उसे वरदान प्राप्त था कि केवल एक स्त्री ही उसका अंत कर सकती है और कोई नहीं जिसके अहंकार में महिषासुर त्रिलोक पर विजय प्राप्त करना चाहता था। उस वरदान के कारण महिषासुर ने देवताओं को हरा ...

मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी है।

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  नमस्कार सभी को। मेरे पिछले ब्लॉग में मैंने मां दुर्गा के पहले रूप मां शैलपुत्री के विषय में जानकारी दी थी । इस ब्लॉग में मां दुर्गा के दूसरे रूप मां ब्रह्मचारिणी के विषय में पढ़ेंगे ।  मां दुर्गा के नौ रूप हमारे भीतर स्थित हमारी शक्ति है जिसका हमें भान नहीं । मां के इन सभी स्वरूपों को हम अपनी शक्ति समझ अपने जीवन को सार्थक कर सकते हैं। मां ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है जिसकी हम नवरात्र के दूसरे दिन पूजा करते हैं। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवम बाएं हाथ में कमंडल रहता है। पार्वती पर्वतराज हिमावन के यहां जन्मी और बचपन से उन्हे महादेव से प्रेम हो गया , वे महादेव से संबंधित वस्तुओं को एकत्रित करती रहती थीं जैसे बेलपत्र , धतूरा इत्यादि। उनकी माता मैनावती को उनका महादेव के प्रति रुझान कतई नहीं भाता था। हिमावान पुत्री को अपनी इच्छा अनुसार वर  चुनने की अनुमति देना चाहते थे इसलिए जब उन्होंने महादेव से विवाह करने का प्रस्ताव रखा तो हिमावां जी ने अपनी पुत्री की माता को मनाने का पूर्ण प्रयास किया और दोनों के प्रयासों से मैनावती मान गईं किंतु महादेव को पाना इतना सरल ...

दुर्गा के नौ रूपों में से प्रथम रूप मां शैलपुत्री है।

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 ।  नमस्कार सभी को। आज से नवरात्र प्रारंभ हो गए हैं। इसलिए में भी सोच रही हूं कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ रूपों का विस्तार से वर्णन करूं तो प्रतिदिन नौ दिनों तक उनके प्रत्येक रूप का वर्णन करूंगी।  नवरात्र स्वयं की प्रतिभा को समझने का अद्भुत महापर्व है। अश्विन मास के शुक्लपक्ष की प्रतिप्रदा से नवमी  तक यह नवरात्र मनुष्य  की आंतरिक ऊर्जाओं के भिन्न भिन्न रूपों  का प्रतिनिधित्व करती है। इनको ही नौ देवियों का  नाम दिया गया  है । शैलपुत्री , ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि , महागौरी , सिद्धिदात्री ये मां दुर्गा के नौ रूपों के नाम अवश्य हैं किंतु ये धार्मिक रूप से हमें बताने का माध्यम है कि ये मनुष्य की अपनी ही ऊर्जा के नौ रूप हैं ।  मां के नौ रूपों में से प्रथम रूप माना जाता है शैलपुत्री जिसके विषय में हम विस्तार से जानेंगे ।  माता सती के स्वयं की ऊर्जा से आत्म दाह करने के पश्चात उन्होंने पर्वतराज हिमावन (हिमालय) के यहां जन्म लिया । उन्होंने प्रेम से अपनी पुत्री का नाम पार्वती रखा । पार्वती को शैलपु...

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